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खुशबू बनकर गुलों से…..

खुशबू बनकर गुलों से उड़ा करते हैं, 

धुआं बनकर पर्वतों से उड़ा करते हैं, 

हमें क्या रोकेंगे ये ज़माने वाले, 

हम परों से नहीं हौसलों से उड़ा करते हैं….।।

 

Khushabu bankar gulo se uda karte he, 

dhua bankar parvato se uda karte he, 

hame kya rokega ye jamane wale, 

ham paro se nahi hoshalo se uda karte he….।।

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