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मुद्दत का सफर भी था और वर्षों की चाहत भी थी…

मुद्दत का सफर भी था और वर्षों की चाहत भी थी,

रुकते तो बिखर जाते, चलते तो टूट जाते,

यूं समझ लो कि….. लगी प्यास गज़ब की थी,

और पानी में भी जहर था,

पीते तो मर जाते,

और न पीते तो भी मर जाते…

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किसी टूटे हुए मकान की तरह हो गया है ये दिल ..

किसी टूटे हुए मकान की तरह हो गया है ये दिल ..!!

कोई रहता भी नही ..!!

और कमबख्त बिकता भी नही ..!!