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तेरे जिस्म पे अपने…

तेरे जिस्म पे अपने जिस्म को रखु,

तेरे होंठो को अपने होंठो से मसलू,

तुझे प्यार मैं इतनी सिद्दत से करू की,

उस मीठे दर्द से तेरी आह निकल जाये, 

दर्द से तेरी आँखों से आसु निकल जाये,

और तू तन से और मान से सिर्फ मेरी हो जाये, 

बदन से तेरे लिपटा रहूँ और सुबह हो जाये,

सुबह तुझसे जब मैं पूछूँ तेरी रात का आलम,

तू शर्मा कर मेरे सीने से लिपट जायें……!!